पुटकापुरी/रायगढ़। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पुटकापुरी में पदस्थ भूगोल की व्याख्याता श्रीमती उर्मिला सिदार के सेवानिवृत्त होने पर विद्यालय परिसर में शिक्षक अभिनंदन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ ने उनका आत्मीय स्वागत एवं सम्मान करते हुए उनके शैक्षणिक योगदान को याद किया। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सेवानिवृत्त होने पर सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उनके साथ बिताए गए समय को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
शिक्षा के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान
श्रीमती उर्मिला सिदार का योगदान केवल विद्यालय में शिक्षण कार्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने साहित्य लेखन के माध्यम से भी समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। उन्होंने ‘भावनाओं की बगिया’, ‘सुन तो ले मोर गोठ’ और ‘मेरा बचपन’ सहित विभिन्न पुस्तकों की रचना की है। इसके अलावा उन्होंने बाल कविताओं के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता और साहित्य के प्रति रुचि को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी सक्रियता ने उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी है।
जीवन विद्या शिविर के माध्यम से संस्कार और मानवीय मूल्यों का प्रसार
श्रीमती उर्मिला सिदार ने मानवीय चेतना और जीवन मूल्यों के प्रसार के उद्देश्य से जीवन विद्या शिविर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इसके लिए भवन निर्माण भी कराया, जहां वर्तमान में शिविर का संचालन किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से लोगों को जीवन जीने की कला, परिवार में आपसी सामंजस्य, सामाजिक संबंधों की समझ और मानवीय मूल्यों से जुड़ी शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका उद्देश्य लोगों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर जीवन में शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक सोच के महत्व से परिचित कराना रहा है।
इस कार्य में उनके पति एवं सेवानिवृत्त श्री मंगल सिंह सिदार भी प्रेरणास्रोत के रूप में सहयोग करते रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी शिक्षा और शासकीय सेवाओं से जुड़े हुए हैं। इस प्रकार सिदार परिवार का शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के प्रति जुड़ाव उल्लेखनीय रहा है।
ग्राम बुलाकी में भी हुआ भव्य स्वागत एवं सम्मान
विद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह के साथ-साथ ग्राम बुलाकी में भी श्रीमती उर्मिला सिदार के सेवानिवृत्त होने पर ग्रामवासियों और परिवार के सदस्यों ने उनका आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव और समाज के प्रति उनके प्रेमभाव, उनके कार्यों तथा उपलब्धियों की सराहना की। कार्यक्रम में शामिल लोगों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी। ग्रामीणों और परिजनों की सहभागिता ने इस अवसर को यादगार बना दिया।
विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में रहा महत्वपूर्ण योगदान
शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना भी होता है। श्रीमती उर्मिला सिदार ने अपने सेवाकाल में शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में योगदान दिया। वहीं, साहित्य लेखन और जीवन विद्या शिविर के माध्यम से समाज के बीच भी शिक्षा एवं जागरूकता का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया।
उनकी सेवानिवृत्ति उनके सेवाकाल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस अवसर पर सहकर्मियों, ग्रामवासियों, परिजनों और शुभचिंतकों ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय और मंगलमय जीवन की कामना की। शिक्षण, साहित्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।


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