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Chakradhar Samaroh सुर, ताल और परंपरा का संगम: चक्रधर समारोह में बस्तर की संस्कृति का भव्य प्रदर्शन

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रायगढ़(नजर छत्तीसगढ़), चक्रधर समारोह के चौथे दिन बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर (बादल) आसना के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपराओं और जनजातीय जीवन की जीवंत झलक प्रस्तुत की। कलाकारों ने लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर साकार किया।
बस्तर की लोक संस्कृति, भाषा-बोली, रीति-रिवाज, परंपराओं और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से गठित ‘बादल’ संस्था द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा चुकी हैं। संस्था के कलाकारों ने बस्तर प्रांगण में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के समक्ष भी सांस्कृतिक प्रस्तुति दी है। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय भी उपस्थित रहे थे। इसके अलावा बस्तर ओलंपिक, चित्रकोट महोत्सव, बस्तर लोकोत्सव, सरस मेला एवं राज्योत्सव जैसे प्रमुख आयोजनों में भी संस्था के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं।

लोकगीतों से सजी प्रस्तुति
बादल संस्था द्वारा बस्तर के लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत करते हुए ‘जादू बस्तर का’ एलबम का निर्माण भी किया गया है। समारोह में कलाकारों ने बस्तर में प्रचलित प्रसिद्ध लोकगीत ‘झाली आना’, ‘लेजा गीत’, ‘परब गीत’ तथा विवाह परंपरा से जुड़ी लोकधुनों की प्रस्तुति दी।

गौर सिंग नृत्य ने मोहा मन
इसके बाद बस्तर के प्रसिद्ध गौर सिंग नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। गौर माड़िया नृत्य अथवा बाइसन हॉर्न डांस के नाम से प्रसिद्ध यह नृत्य बस्तर की दण्डामी माड़िया जनजाति की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुरुष कलाकारों के सिर पर गौर सिंग से बने मुकुट और हाथों में माड़िया ढोल तथा महिला कलाकारों के हाथों में पारंपरिक वाद्ययंत्र इस नृत्य की विशेष पहचान हैं। गौर सिंग नृत्य दल का नेतृत्व गणेश मंडावी ने किया। दल में समीर कुमार पोयाम, मंगलों मंडावी, फगनू राम पोयाम, लक्ष्मण पोड़ीयामी, बकसू मंडावी, मासों मंडावी, मुड़ो राम मंडावी, कायाराम मंडावी, रमेश कुमार मंडावी, बसंत पोड़ीयामी, फूलमती मंडावी, हान्दे वट्टी, सामला मंडावी, शशि, कुमली मंडावी, आरती कश्यप, शांति मंडावी, लक्ष्मी एवं बुधरी मंडावी शामिल रहे।

धुरवा मंडई लोकनृत्य ने दिखाई जनजातीय परंपरा
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में धुरवा मंडई लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। धुरवा जनजाति से जुड़ा यह लोकनृत्य फसल कटाई के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना एवं आभार प्रकट करने की परंपरा से जुड़ा है। मंडई के अवसर पर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना के साथ इस नृत्य का आयोजन किया जाता है। धुरवा मंडई नृत्य दल का नेतृत्व तेजेन्द्र कुमार कश्यप ने किया। दल में धनीराम नाग, सोनू राम, डेविड नाग, फुलचंद, धनीराम बघेल, हरीराम, धर्मेन्द्र, बिट्टो, मनीराम कश्यप, शंकर, दीपक, संतोष, गुंजन नाग, दिव्या बघेल, लक्ष्मी, उमा, बबिता, चितामनी एवं लता ने प्रस्तुति दी। बादल आसना के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बस्तर की लोकधुनों, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया तथा चक्रधर समारोह के मंच को बस्तर की लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।

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