रायगढ़ (नजर छत्तीसगढ़) । 41वें चक्रधर समारोह की चौथी शाम सुप्रसिद्ध कथक कलाकार मधुमिता रॉय मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को कथक की शास्त्रीय नृत्य परंपरा और उसकी विविध शैलियों से परिचित कराया। पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज की वरिष्ठ शिष्या मधुमिता रॉय मिश्रा ने कथक की पारंपरिक शैली, भाव, लय और ताल का सुंदर संयोजन प्रस्तुत किया।
चक्रधर समारोह के मंच पर उनके साथ श्रीयंका माली, अनिमिखा दे, चन्द्रिका दास, प्रसेनजीत मजूमदार और अमित कुमार दास ने सहभागिता की। कार्यक्रम में ओम ब्रह्मे, भजन-द्रौपदी चीर हरण, ध्रुपद और कथक फ्यूजन की प्रस्तुतियां शामिल रहीं। कलाकारों ने भावाभिनय, पद संचालन, लयकारी और ताल के माध्यम से कथक की अलग-अलग प्रस्तुतियों को जीवंत किया। मधुमिता रॉय मिश्रा कथक के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। वे दूरदर्शन की शीर्ष श्रेणी की कलाकार होने के साथ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की उत्कृष्ट श्रेणी की कलाकार हैं। वे राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त कर चुकी हैं और दिल्ली स्थित कथक केन्द्र से फैलोशिप भी हासिल कर चुकी हैं। संगीत नाटक अकादमी से मान्यता प्राप्त कलाकार के रूप में उन्होंने देश के अनेक प्रतिष्ठित समारोहों में प्रस्तुति दी है।
उन्होंने खजुराहो महोत्सव, ताज महोत्सव, कथक महोत्सव, वाराणसी के संकट मोचन महोत्सव, राजगीर महोत्सव और निशागंधी महोत्सव सहित विभिन्न प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुतियां दी हैं। आईसीसीआर और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की कलाकार के रूप में उन्होंने अमेरिका, कनाडा, इटली, जर्मनी, मिस्र, इंडोनेशिया, चीन, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां दी हैं। वर्तमान में वे कोलकाता के रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।
Chakradhar Samaroh चक्रधर समारोह में मधुमिता रॉय मिश्रा ने कथक की शास्त्रीय नृत्य की विविधता से कराया परिचित

CG CINEMA NEWS
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